पत्थलगांव मामले को बारीकी से समझने की जरूरत है
मामला सिर्फ जमीन मामले से जुड़ा हुआ नहीं था वहां अमित पांडेय जो कि खुद को पत्रकार बताता है वह कुछ महिलाओं को लेकर थाने पहुंचता है और बिना किसी बात के थाने में हल्ला मचाना शुरू कर देता है अमित पांडेय ने स्थानीय विधायक पर झुठा आरोप लगाते हुए पोस्ट डालता है कि गोमती साय के गुंडे उन्हें पीटने आए हैं उसके बाद आरोप लगाता है कि अग्रवाल समाज के लोग उसके साथ मार पीट कर रहे है अब जबकि मारपीट नहीं हुई थी बहस ही हो रहा था इस दौरान अमित पांडेय के मुख से अप शब्द निकलता है जिससे अग्रवाल समाज के लोग नाराज हो जाते है एसडीओपी पुलिस अधिकारी के द्वारा उन्हें शांत करने का प्रयास किया जाता है। दोनों पक्ष के लोग आपस में बात कर थाने से बाहर आ जाते है। अमित पांडेय ने कहा कि समाज उनके द्वारा अग्रवाल समाज को लेकर जो टिप्पणी की है उसके लिए क्षमा चाहता है। कुछ देर बाद अमित पांडेय के द्वारा उक्त महिलाओं के लेकर बिना किसी प्रशासनीय मंजूरी के एक रैली निकाल देता है जिसमें उसके द्वारा अग्रवाल समाज को उकसाने वाले नारे लगाते हुए बस स्टैंड तक पहुंचता है। उसके बाद भी पत्थलगांव के अग्रवाल समाज के लोगों ने इस मामले को अनदेखा करते हुए कोई प्रतिक्रिया नहीं देते जिससे अमित पांडेय का काम फैल होता नजर आता है।अब उसके द्वारा एसडीओपी के ऊपर आरोप लगाया गया है की उनके द्वारा उन्हें जातिगत गालियाँ दी गई है। यह व्यक्ति हर किसी पर आरोप मढ़ रहा है क्या उसके द्वारा जातिगत पोस्ट डालना उचित है अमित पांडेय के द्वारा पत्थलगांव में हिंसा कराने की मनसा रखता है। अगर उसे सच में आदिवासी भाई बहनों की परवाह है तो न्यायालय की शरण ले सकता है पर उसे तो हिंसा कराने में और अपनी रोटी सेकने में मजा आ रहा है पत्थलगांव में लगभग 85 पत्रकार है जो लगभग हर समाज से है। आदिवासी कई प्रतिनिधि है आदिवासी समाज के अध्यक्ष उपाध्यक्ष एवं अन्य कई पदाधिकारी नियुक्त किए गए हैं आदिवासी समाज के द्वारा उन्हें इस मामले की जानकारी नहीं है क्या बस अमित पांडेय को ही क्यों चुना गया इनके द्वारा क्योंकि अमित पांडेय ने उन्हें चुना है खुद को सरगुजा का पत्रकार बताता है क्या सरगुजा क्षेत्र में उसे मामले नहीं मिल रहे जिसमें वो बेसहारा लोगों की मदत करता पर नहीं उसे पत्थलगांव आना है कुछ लोगों को भड़का कर उनसे रैली निकाल कर शान्त पत्थलगांव का माहौल खराब करना है।