कार्यालय में बुलाकर लिखित बयान बदलवाने का आरोप
जांच में आरोप प्रमाणित, फिर भी कार्रवाई नहीं!
विभागीय आदेशों की अनदेखी, प्रभारी पद पर अब भी कायम अधिकारी
237 दिन से जांच लंबित, गवाहों के बयान के बीच समन्वयकों से कथित रूप से नए बयान लिखवाने का मामला

कार्यालय में बुलाकर लिखित बयान बदलवाने का आरोप
मामले का एक और संवेदनशील पहलू अब सामने आ रहा है। आरोप है कि विभागीय जांच से जुड़े कुछ संकुल शैक्षिक समन्वयकों को संबंधित प्रभारी अधिकारी के कार्यालय में बुलाकर उनके लिखित बयान लिए गए तथा पूर्व में जांच के दौरान सामने आए कथनों से अलग बयान लिखने के लिए उन पर दबाव बनाया गया। आरोप यह भी है कि समन्वयकों से लिखित रूप में यह दर्ज कराया गया कि संबंधित अधिकारी द्वारा किसी प्रकार की राशि की वसूली नहीं की गई।
बताया जा रहा है कि ऐसे लिखित कथनों को बाद में संबंधित जिला शिक्षा अधिकारी कार्यालय में प्रस्तुत कर पूर्व में लगाए गए आरोपों को निराधार साबित करने के प्रयास के रूप में इस्तेमाल किया जा रहा है।
यदि ऐसा हुआ है तो यह अत्यंत गंभीर विषय है, क्योंकि विभागीय जांच में इन्हीं संकुल समन्वयकों में से अनेक को अभियोजन साक्षी के रूप में सूचीबद्ध किया गया है। आयुक्त कार्यालय के अभिलेख में कुल 28 अभियोजन साक्षियों की सूची दर्ज है।
ऐसी स्थिति में जांच की निष्पक्षता सुनिश्चित करने के लिए आवश्यक होगा कि संबंधित समन्वयकों के पूर्व में दर्ज बयान और बाद में प्रस्तुत लिखित बयानों का तुलनात्मक परीक्षण कराया जाए तथा यह स्वतंत्र रूप से सत्यापित किया जाए कि बाद के बयान उन्होंने अपनी इच्छा से दिए हैं अथवा किसी प्रशासनिक दबाव या प्रभाव में।
जांच की विश्वसनीयता के लिए यह भी जरूरी है कि साक्षियों के बयान संबंधित अधिकारी की प्रत्यक्ष उपस्थिति या प्रभाव से अलग, स्वतंत्र वातावरण में दर्ज किए जाएं। इससे वास्तविक तथ्य सामने आने की संभावना बढ़ेगी और जांच के अंतिम निष्कर्ष पर भी किसी प्रकार का संदेह नहीं रहेगा।